Savitri vat Vrat इस वर्ष बना रहा खास संयोग सुहागिनी के सबसे पवित्र व्रत

Savitri vat Vrat ::लगातार 2 सालों से करोना-कॉल के बाद इस| बार सामूहिक रूप से महिलाओं को संयुक्त होकर पूजा करने का मौका मिला है| कुछ महिलाएं तो रविवार को व्रत रख रही हैं वही कुछ महिलाओं ने सोमवार को ही व्रत रख लिया था महज इसमें कोई हैरानी की बात नहीं है|




क्योंकि दोनों संयोग रविवार और सोमवार दोनों में ही Vat Savitri Vrat का संयोग बहुत ही मंगलकारी एवं शुभ माना गया है| क्योंकि इस बार महिलाओं द्वारा वटवृक्ष के पास जाकर विधिवत पूजा अर्चना करने की छूट मिली थी |

मान्यता है कि ? | Savitri vat Vrat

Savitri vat Vrat::महिलाओं द्वारा किया जाने वाला यह बट-व्रत अपने पति को लंबी आयु ,समृद्धि, उत्तम स्वास्थ्य, जीवन के लिए वट सावित्री का व्रत महिलाओं द्वारा रखा जाता है| जिसका संबंध उनके पति की लंबी आयु प्राप्त एवं सुहाग बना रहे|

Savitri vat Vrat, यह संयोग अमावस्या तिथि रविवार को दोपहर 2:55 अगले दिन सोमवार शाम 5:00 बजे तक रहने की उम्मीद थी| हालांकि कुछ महिलाओं द्वारा इसे रविवार को ही व्रत रख लिया गया था जबकि कुछ महिलाओं द्वारा यह व्रत सोमवार को ही वटवृक्ष पास जाकर विधि पूर्वक पूजा करके अपने पति के लिए सुख समृद्धि का व्रत को विधिपूर्वक समाप्त किया गया|

Savitri vat Vrat

मान्यता यह भी है की ? – Savitri vat Vrat

हिंदू पौराणिक कथाओं के आधार की बात किया जाए तो सावित्री के पति सत्यवान को यमराज जी द्वारा सत्यवान को लेकर जाने के बाद इसी वटवृक्ष के नीचे है सावित्री द्वारा तपस्या किया गया था तपस्या से प्रसन्न होकर यमराज द्वारा सावित्री को उनके पति सत्यवान को जीवित होने का आश्वासन दिया जाता है| जिस दिन उन्हें यमराज द्वारा दिया गया आश्वासन उस दिन को जेष्ठ मास की अमावस्या कहा जाता है|

  • सनातनी संस्कृति मान्यता यह भी है कि वटवृक्ष मैं पृथ्वी के तीनों देवताओं का निवास होता है ब्रह्मा ,विष्णु ,महेश

Savitri vat Vrat – सावित्री व्रत कथा

Savitri vat Vrat :- सावित्री द्वारा मन ही मन में सत्यवान को अपना पति के रूप में स्वीकार कर लिया था तब यह बात सावित्री को मालूम नहीं थी कि उनके पति सत्यवान का आयु अनिश्चित काल के लिए ही बचा है |नारद जी द्वारा सावित्री को यह बताया जाता है| कि सत्यवान की आयु बहुत कुछ समय के लिए ही बची है आप उन को पति के रूप में अस्वीकार कर दें अन्यथा विवाह के कुछ समय बाद ही सत्यवान की मृत्यु हो जाएगी नारद जी के लाख समझाने के बावजूद भी सावित्री यह नहीं मानती हैं|

सावित्री कहते हैं मैं उनको पति मान चुकी हूं मेरी विवाह उन्हीं से होगी और सावित्री ने सत्यवान से विवाह किया विवाह के उपरांत ही कुछ समय के बाद सत्यवान की मृत्यु हो जाती है| सावित्री जो कि एक देवी की रूप होती हैं सत्यवान की मृत्यु होने के बाद उन्हें आभास होता है| कि यमराज जो कि सत्यवान की प्राण को लेकर दक्षिण की दिशा में चले जा रहे थे यमराज के पीछे-पीछे चली जा रही हैं|

Savitri vat Vrat, यमराज सावित्री को पीछे देख सावित्री को वापस जाने के लिए कहते हैं| लेकिन होना क्या था सावित्री भी एक जिद्दी प्रवीण की महिला होती हैं यमराज के लाख कहने के बावजूद सावित्री उनके पीछे पीछे चली जाती हैं यमराज सावित्री को पीछे आते देख सावित्री जी से कहते हैं|आप मुझसे तीन वरदान मांग लीजिए लेकिन आप नीचे चले जाइए वरदान की बात आते देख सावित्री ने तुरंत अपने पहले वरदान की समीक्षा कर देती है|

Savitri vat Vrat, पहले वरदान में उन्होंने अपने सास और ससुर की नेत्र की ज्योति मांग लेती है| यमराज द्वारा तथास्तु बोल कार पूरा किया जाता है| सावित्री ने दूसरे वरदान के रूप में अपने सास और ससुर द्वारा अजीत की हुई राज्य– पाठ को मांग लेते हैं यमराज द्वारा दूसरे वरदान को भी तथास्तु करके दिया जाता है| उपरांत उन्होंने तीसरा वरदान भी मांगने की पेशकश करती हैं यमराज हामी भर देते हैं सावित्री द्वारा तीसरे वरदान के रूप में 100 सुपुत्र की मां बनाने की तथा अखंड सौभाग्यवती होने का वरदान मांगती हैं यमराज द्वारा बिना सोचे समझे वरदान को भी पूरा करने का वादा किया जाता है फिर क्या था ????

यमराज वरदान से हारे क्यों??

यमराज द्वारा सावित्री को दिए गए वरदान में बिना सोचे समझे वरदान के कारण यमराज को सावित्री को उनके पति को वापस करना पड़ा क्योंकि सावित्री ने यमराज से बोली आपने तो मुझे सौ (100)पुत्रों का मां बनने का वरदान दिया है| मैं एक पतिव्रता स्त्री हूं अगर मेरे पति नहीं होंगे तो मेरे सौ (100) पुत्रों की मां बनने की ख्वाहिश पूरा कैसे होगा यह बात सुनते ही यमराज अपने सर को पकड़ लेते हैं एवं अपने द्वारा की गई गलती का एहसास होता है| यमराज द्वारा की गई गलती के कारण सावित्री को सत्यवान का प्राण यमराज द्वारा लौटाना ही पड़ता है

Savitri vat Vrat:: वैसे एक मान्यता यह भी है कि वट वृक्ष के नीचे सावित्री द्वारा तपस्या कर अपने पति सत्यवान को जीवित कर लिया गया था इसीलिए इस व्रत को सावित्री या फिर कह लीजिए वटवृक्ष सावित्री के नाम से भी जाना जाता है

वट-वृक्ष की पूजा कैसे करें?

  • वट-वृक्ष के जड़ों में जल समर्पित करें| जल को समर्पित करने के दौरान वृक्ष के चारों ओर परिक्रमा करें|
  • वट-वृक्ष के चारों ओर दीपक जलाए
  • वट-वृक्ष के मुख्य तने में पीले एवं लाल धागों का परिक्रमा कर अपनी इच्छा अनुसार फेरी लगाएं|
  • वट-वृक्ष की जड़ों में अक्षत ,फूल , रोली, सिंदूर. चंदन. पुष्पा चढ़ाएं|
  • आटे की बनाई दीपक में देसी घी की दीपक जलाएं|
  • ब्रह्मा, विष्णु, महेश तीनों देवताओं का आप ध्यान लगाएं|
  • वट-वृक्ष के नीचे बैठ के जितनी भी महिलाएं हैं वह सत्यवान की कथा का श्रवण जरूर करें
  • कच्चे सूत को चढ़ा के आरती करें|

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