Anant Chaturdashi Management 2022 अनंत चतुर्दशी व्रत | ज्योतिषाचार्य से जानिए शुभ मुहूर्त बप्‍पा का विसर्जन और भगवान विष्‍णुअनंत की पूजा

Anant Chaturdashi Management 2022 Anant Chaturdashi Vrat Know the auspicious time from the astrologer. Bappa’s immersion and worship of Lord Vishnu :-अनंत चतुर्दशी गणेश विसर्जन हिंदुओं और जैनियों द्वारा मनाया जाता है| सामान्य तौर पर यह त्यौहार अनंत चतुर्दशी 10 दिवसीय गणेश महोत्सव के उत्सव में मनाया जाता है| गणेश चतुर्दशी उत्सव का अंतिम दिन भी माना जाता है| इसे गणेश चौदस भी कहा जाता है| इस दिन को गणेश जी की प्रतिमा को पानी में विसर्जित कर देवगढ़ को विदा किया जाता है| सामान्य तौर पर इसे देखा गया है कि अनंत चतुर्दशी गणेश चतुर्दशी के 10वे दसवें दिन बाद आती है|




Anant Chaturdashi Management 2022
Anant Chaturdashi Management 2022

हिंदू धार्मिक मान्यता :- जैन कैलेंडर के हिसाब से अगर देखा जाए तो यह महत्वपूर्ण दिन श्वेतांबर जैन भादवा महीने के अंतिम 10 में दिन में पालन करते हैं| दिगंबर जैन 10 दिन 10 लक्षण पर्व और चतुर्दशी जिसे हम 14 से में के नाम से जिस दिन जैन धर्म द्वारा जानबूझकर या फिर जाने अनजाने में कोई भी गलतियां की हुई है उनकी क्षमा मांगते हैं उस दिन को अनंत चतुर्दशी का 1 दिन बाद मनाया जाता है यह दिन जब वर्तमान ब्राह्मण डियर चाक 12 वें तीर्थंकर भगवान वासुपूज्य के निरमा प्राप्त किया था,

अनंत चतुर्दशी की कथा – (Story of Anant Chaturdashi)

Anant Chaturdashi Management 2022 :-अनंत चतुर्दशी मनाने की धारणा यही है कि, सुमंत नाम का एक ब्राह्मण था| उनकी एक पत्नी जिनका नाम दीक्षा था जिनकी एक पुत्री सुशीला थी किसी कारण व दीक्षा की मृत्यु के बाद सुमंत ब्राह्मण द्वारा कारकस नाम की स्त्री से एक दूसरी शादी रचाई गई जिसमें उनकी दूसरी माता के द्वारा सुशीला को बहुत ज्यादा प्रताड़ना झेलना पड़ता था| सुशीला ने कौंडिन्य से शादी रचाई अपनी माता की प्रताड़ना से बचने के लिए उन्होंने घर छोड़ने का फैसला लिया

घर छोड़ने के दौरान रास्ते में एक नदी के पास रुके| कौंडिन्य स्नान करने चला गया वही सुशीला पूजा करने वाली महिलाओं के समूह में शामिल हो गई महिलाओं द्वारा सुशीला को बताया जाता है कि, हम लोग अनंत प्रभु की पूजा कर रहे हैं| सुशीला द्वारा पूछा जाता है| यह कैसा पूजा है ? सुशीला ने पूछा महिलाओं ने उनको बताया यह अनंत की प्रतिज्ञा की पूजा है|

एवं उनके महत्व को एवं अनुष्ठानों के बारे में उन्हें बताया जाता है, कुछ तले हुए आटे के बने और अनन्य प्रकार से भोजन तैयार किए जाते हैं, जिसमें आधा ब्राह्मणों को देना होता है|एवं पवित्र घास से बना हुआ एक सांप की टोकरी में रखा जाता है, फिर सर्प की पूजा सुगंधित धूप तेल दीपक अगरबत्ती जलाकर सर्प को भोजन करा जाता है| एवं रेशम की जोड़ी में भगवान के सामने रखकर कलाई से बांधा जाता है|

इसी स्ट्रिंग को अनंत Anant Chaturdashi कहा जाता है| इसे व्रत को 14 साल तक व्रत रखा जाता है| यह सारी कथाएं सुनने के बाद सुशीला द्वारा अनंत व्रत करने की लहक उम्र पढ़ती है| और अनंत चतुर्दशी का व्रत सुशीला द्वारा कर लिया जाता है| उस दिन के बाद सुशीला के पति की समृद्धि बढ़ने लगती है| और वह बहुत अमीर हो जाते हैं,सुनीता द्वारा अपने पति के बाएं हाथ में अनंत डोर सूत बांधती है, एवं व्रत की कहानी उन्हें सुनाती है|

उनके पति इस व्रत को सुनकर नाराज होते हैं| और कहते हैं की, किसी व्रत के कारण नहीं बल्कि अपने स्वयं के प्रयासों से मुझे ज्ञान प्राप्त हुआ और मैं अमीर बना इसके बाद गरमा गरम बहस होती है| अंत में पत्नी के हाथ से अनंत डोर को लेकर अग्नि में फेंक दिया जाता है| उसके बाद से सुनीता की पत्ती के जीवन में अत्यधिक विपत्तियां आने लगती हैं वह अत्यधिक गरीबी हो जाते हैं अंततः अपमान करने की सजा और उन्होंने फैसला लिया कि भगवान उनके सामने नहीं आएंगे तब तक वह कठोर तपस्या करेंगे |

अनंत चतुर्दशी का महत्व (Anant Chaturdashi 2022 importance)

Anant Chaturdashi Management 2022 :-अनंत चतुर्दशी को भगवान विष्णु का पूजा किया जाता है| इस दिन भगवान विष्णु को 14 लोको को ताल, अतल, वितल, सुतल, सलातुल, रसातल, पाताल, भू, भुवः, स्वः, जन, तप, सत्य, आदि की रचना की थी इसी दिन को ही गणेश जी का विसर्जन किया जाता है जिन लोगों को रोग ठीक नहीं हो रहे हैं उन लोगों द्वारा यह व्रत रखने में आराम मिलने की प्रविष्टा होती है या बरात उनके फैमिली में कोई भी मेंबर रख सकता है चाहे पति हो या पत्नी हो या पुत्र या पुत्री कोई भी व्रत रख सकता है|

अनंत चतुर्दशी में 14 गांठ लगाने का क्या कारण हैं

What are the reasons for putting 14 knots on Anant Chaturdashi?

Anant Chaturdashi Management 2022 : मान्यता यह है कि अनंत चतुर्दशी को सूत यार ऐसे कथा कुमकुम से रंग कर उनमें 14 गांठ लगाई जाती हैं और उससे विधि विधान पूर्वक जाता है एवं बाद में कलाई पर बांधा जाता है कलाई पर बांधी गए इस धागे को ही अनंत कहा जाता है भगवान विष्णु का स्वरूप माने जाने वाले इस धागे को रक्षा सूत्र भी कहा जाता है यह 14 गांव भगवान श्री हरि के 14 लोगों की प्रतीक मानी गई है अंततः चतुर्दशी पर गणेश जी का विसर्जन शुभ माना जाता है|

अनंत चतुर्दशी 2022 पर गणेश विसर्जन भी

Anant Chaturdashi Management 2022 :-अंततः चतुर्दशी पर भगवान विष्णु की पूजा की जाती है| वही देखा जाए तो गणेश चतुर्दशी का दसवां दिन आज विदा करने का समय भी होता है| आज भक्तों द्वारा श्री गणेश जी को खुशी-खुशी विसर्जित एवं प्रार्थना भी किया जाता है कि, अगले साल भी आपको जल्द ही बुलाया जाएगा इस बार अंततः चतुर्दशी पर पूरे दिन पंचक लगा रहेगा इस दिन भद्र का भी आया है भद्रा शाम 6:00 बजे 7 मिनट अगले दिन 10 को सुबह 4:45 बजे तक रहेगा

पंचक को क्यों मानते हैं अशुभ-Why Panchak is considered inauspicious

Anant Chaturdashi Management 2022 :-ज्योतिष शास्त्रों की मानें तो ओपन चौक बहुत ही शुभ योग माना जाता है इस दिन चंद्रमा का धनिष्ठा नक्षत्र के तृतीय चरण शतभिषा, पूर्वाभाद्रपद, उत्तराभाद्रपद तथा रेवती नक्षत्र के चारों चरणों में भ्रमण काल पंचक होती है| मान्यता यहां तक यह भी है कि, पंचक काल में कोई भी अशुभ काम होने से उसके पांच बाद होने की संभावना रहती है| आशंका हो जाती है इसीलिए इस पंचों को अशुभ माना जाता है|

सुबह से ही डोरे और पूजन सामग्री की बिक्री

Anant Chaturdashi Management 2022 :- सुबह से ही देखने को मिल रहा है अंतर चतुर्दशी का धूम पूजन सामग्री की बिक्री हो गई तेज अंतः चतुर्दशी को लोग मनाने के लिए मार्केट में खरीदारी महिलाओं द्वारा तेज कर दी के विभिन्न मंदिरों महिलाओं द्वारा पूजा अर्चना करना भी शुरू हो गया बाजार में आज से सुबह ही से ही दूर है ,और पूजन सामग्री की बिक्री बेपरवाह बना हुआ है

अनंत चतुर्दशी 2022 पूजा मुहूर्त

Anant Chaturdashi Management 2022 :– हिंदू पंचांग के अनुसार चतुर्दशी तिथि 08 सितंबर 2022 9:00 बज कर से प्रारंभ होगी जो कि 9 सितंबर 6:00 बज के समाप्त होगी अंता चतुर्दशी पूजा मुहूर्त सुबह 6:00 बजे से 3 मिनट शाम 6:00 बजे 7 मिनट तक रहेगा पूजन की कुल अवधि 12 घंटे 4 मिनट की हैं|

अनंत चतुर्दशी व्रत और पूजा विधि

Anant Chaturdashi 2022 : अनंत चतुर्दशी के दिन व्रत एवं पूजा का संकल्प किया जाता है फिर कलश स्थापना करके उस पर उस से बने हुए भगवान अनंत की स्थापना करते हैं उसके बाद कच्चे सूत एवं हल्दी का कुमकुम से सूत को रंग के अनंत धागा बनाया जाता है एवं उसे क्लास के पास रख लेते हैं फिर भगवान आनंद की पूजा करते हैं उनसे प्रार्थना करते हैं| हे भगवान हमें धन धान्य समृद्धि और हमारी रक्षा करें

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